Friday, April 1, 2011

अँधेरे का आविष्कार किया

बड़ा अँधेरा है सड़क पर
कोई रौशन करता  तो अच्छा था.

जाना कहाँ है पता नहीं 
कोई राह दिखाता तो अच्छा था.

अरमानों की धुंध बड़ी है
कोई लक्ष्य दिखाता तो अच्छा था.





                      
 जाने किस "कोई" के इंतज़ार में खड़ा है तू 
जो मैं समझ पाता तो अच्छा था.
                                  
मैं ही तो एक मात्र व्याप्त हूँ
जो तू समझ पाता तो अच्छा था.






Picture of Flowers in a Garden Border - Free Pictures - FreeFoto.com

खैर खता तेरी नहीं, मेरी ही है 
जो तुझे देखने को संसार दिया.

मैंने रौशनी दिखाई और तुने अँधेरे का आविष्कार किया !












शाम बनायी मैंने ताकि मैं तुझसे मिल पाऊं
अरे पागल! आँखे बंद करे तू थोड़ी, तो मैं थोडा रास्ता दिखलाऊँ !

मन-रंजन को दिए थे सपने, 
तुने खुद को ही रंग डाला

अब कहता है धुंध बड़ी है - अति सेवन ही बन गयी हाला !